भागलपुर में विक्रमशिला सेतु हादसा: 133 नंबर पिलर ध्वस्त, गंगा में समाया स्लैब – जानिए पूरी कहानी
बिहार के भागलपुर में गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु पर रविवार देर रात एक बड़ा हादसा हो गया। करीब रात 1:10 बजे पुल का 133 नंबर पिलर पूरी तरह ध्वस्त हो गया, जिससे उस पर टिका स्लैब सीधे गंगा नदी में समा गया।
गनीमत यह रही कि समय रहते प्रशासन और पुलिस ने पुल पर आवाजाही रोक दी थी, जिससे कोई बड़ा जनहानि नहीं हुई।
🕒 कैसे शुरू हुआ हादसा?
• रात 11:33 बजे: पिलर संख्या 133 अचानक बैठना शुरू हुआ
• रात 11:55 बजे: पिलर काफी झुक गया
• तुरंत कार्रवाई: पुलिस जवानों ने अधिकारियों को सूचना दी
• आदेश: भागलपुर रेंज के आईजी विवेक कुमार ने SSP प्रमोद कुमार यादव और नवगछिया SP राजेश कुमार को तुरंत आवाजाही रोकने के निर्देश दिए
• रात 1:10 बजे: पिलर पूरी तरह ध्वस्त होकर नदी में समा गया
🌉 विक्रमशिला सेतु: एक नजर में
• उद्घाटन: राबड़ी देवी द्वारा वर्ष 2001 में
• लंबाई: लगभग 4.7 किलोमीटर
• महत्व: उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाला प्रमुख पुल
• दैनिक उपयोग: हजारों वाहन और 1 लाख से अधिक लोगों की आवाजाही
🚧 हादसे के बाद प्रशासनिक कदम
घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत पुल को पूरी तरह बंद कर दिया।
शहर में ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए भारी वाहनों को:
• घोंघा
• सबौर
• जगदीशपुर
• कजरेली
जैसे इलाकों में ही रोक दिया गया है।
⚠️ क्या लापरवाही बनी हादसे की वजह?
स्थानीय लोगों और शुरुआती जानकारी के अनुसार:
• पिलर की प्रोटेक्शन वॉल करीब एक महीने पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुकी थी
• पिछले 8 वर्षों से बड़े स्तर पर मरम्मत नहीं हुई थी
• लगातार दबाव और रखरखाव की कमी से पिलर नंबर 133 कमजोर हो गया था
लोगों का मानना है कि अगर समय रहते मरम्मत की गई होती, तो इस हादसे को टाला जा सकता था।
🌍 प्रभाव: टूटा अहम संपर्क मार्ग
इस हादसे के बाद नवगछिया और भागलपुर के बीच सीधा संपर्क टूट गया है।
यह पुल बिहार के बड़े हिस्से को झारखंड से जोड़ने का प्रमुख माध्यम भी था, इसलिए इसका असर व्यापक स्तर पर देखने को मिलेगा।
🔍 जांच और आगे की कार्रवाई
प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और जल्द ही तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की मरम्मत और पुनर्निर्माण की योजना बनाई जाएगी।



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